Sunday, 4 September 2016

सन् 1930 की एक सोवीयत पहेली

कल दफतर में ब्राउज़िंग करते वक्त सोवियत रसाले ज़नानीये सीला (Знание сила) का सन् 1930 के फरवरी में छपा एक इस्यू मिला। अभी मेरी रूसी इतनी अच्छी नही है कि मैं पूरी मैगज़ीन पढ सकूँ लेकिन रसाले के पहले सफे के सैक्शन "पहेलीयाँ और चुटकले" की पहली पहेली को एक डिक्शनरी की मदद से पढ लिया। अब मैं उसके हिन्दी तरजुमें को आप के साथ शेयर कर रहा हूँ। मेरी कोशिश जारी है। आप देखीये क्या आप इस 1930 की पहेली को सुलझा सकते हैं।



Задачи-шутки (बायीं तरफ टाॅप)


पहेली: Из двух свечей одинаковой длины одна может гореть 4 часа, а другая 5 часов. Однажды их зажгли одновременно на некоторое время и затем одновременно же потушили. Из двух огарков один оказался в четыре раза больше другого. Сколько времени горели свечи и какая часть каждой из них осталась?

अनुवाद: दो मोमबत्तीयों में से एक 4 घंटे और दूसरी 5 घंटे जल सकती है। एक बार दोनो को एक ही वक्त पर जला दिया गया और फिर एक ही वक्त पर बुझा दिया गया। अब यह देखा गया कि दोनो में से एक में दूसरी से चार गुना मोम बचा था। कितने समय तक मोमबत्तीयां जलीं और दोनों का कितना हिस्सा अभी तक बचा है?

Tuesday, 23 August 2016

दो सवाल हमारे समाज के बारे में

आज आॅफिस से आते वक्त एक रिक्शेवाले ने एक घर का पता पुछा। पता अंग्रेज़ी में लिखा हुआ था जिसे पढने में वह बुढा रिक्शेवाला असमर्थ था। वह अपने ग्राहक से भी नही पूछ सकता था क्यूंकि रिक्शे में किसी ग्राहक की बजाये सामान का एक डब्बा था। बेचारा। लेकिन इत्तेफाकन अच्छी बात यह हुई कि जिस घर में वह जाना चाहता था, उस का नंबर 2115 था और उस ने पता मकान नंबर 2124 के सामने खडे हो कर पुछा था। इस लिए मैं और अनीता (जो दफतर में साथ ही काम करती है) उस के साथ चल पडे और घर दिखा दिया।

इस बात ने मुझे दो बातें सोचने पर मजबूर किया।

पहली तो यह कि क्या वह रिक्शेवाता पढ नही सकता था? अगर वह पढने के नाकाबिल था तो उस की ज़िन्दगी कैसी होगी? और उस की ना पढ पाने की हालात का जिम्मेवार कौन है? वह खुद, उस के माँ-बाप, सरकार या, खलील जिबरान की नज़रों में, हम सब लोग जो कि अपनो का ही ख्याल रखने में नाकाबिल सिद्ध हो रहे हैं?

दूसरी बात जो मेरे ज़हन में आयी वो यह थी कि अगर वह रिक्शेवाला पढ सकता था तो जिस ने भी उसे पैसे दे कर भेजा, उस ने हिन्दी या पंजाबी या उस रिक्शेवाले की भाषा में पता क्यूँ नही लिखा? क्या उसे किसी स्थानिय ज़ुबान का इलम नही था? या फिर अंग्रेज़ी में लिखना रौब दिखाने का एक तरीका था?

मालूम नही।

Sunday, 21 August 2016

इस साल के गोलस की रिपोर्ट

साल के तकरीबन 8 महीने बीत चुके हैं और मैं अभी भी अपने गोल से बहुत दूर हूँ। इस साल मेरे दो गोल हैं: रुसी भाषा में किताबें पढ़ना शुरु करनी, और C++ और Qt को यूज़ करते हुए एक हिन्दी-रुसी डिक्शनरी बनानी या फिर कोई ऐसा प्रोग्राम बनाना जिसे प्रोफैश्नल प्रोग्रैमर इस्तेमाल लाइक समझें। अभी इस बात का जाएज़ा लेते हैं कि मैं कहाँ तक पहुँचा हूँ?

छोटे मोटे प्रोग्राम बनाने और एक महीने लगातार प्रैकटिस करने के इलावा मैंने कुछ भी नही किया। रूसी में मैनें A1 लैवल की एक किताब पढ़ ली है। लेकिन यह कोई बड़ी बात नही है। अभी रास्ता काफी लंबा है।

तो अब से मेरी कोशिश रहेगी कि वक्त कम ज़ाया करूँ और पढ़ाई पर ज़्यादा ध्यान दूँ। अब इस हफ्ते का गोल निरधारित करता हूँ।

- रोज़ कम से कम 4-5 घटें पड़ना
- 2 घटें C++ और 90 मिनट रूसी और बाकी वक्त साहित्य पढ़ना

पलैन काफी बनते हैं लेकिन अमल ही नही होता। ताकि मैं पुरानी गलतीयों को ना दोहरा पाऊँ, इस लिए अगले हफ्ते भी लिखूँगा कि मैंने इस हफ्ते क्या किया।

Thinking in C++ और Progit किताबों के पहले तीन-तीन चैपटरों की प्रैक्टिस। जहाँ तक रूसी का सवाल है, मैं प्रिंसटन युनिवरसिटी के रूसी कोरस 14वें चैपटर पर हूँ। इस हफ्ते का मकसद रहेगा 10 सबक खत्म करने। इस के इलावा तातियाना क्लीमोवा के पोडकास्ट के तीन एपीसोड सुनने।